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हमने इंसान को बनते हुए पत्थर देखा |–डॉ. प्रेम जौनपुरी

हमने इंसान को बनते हुए पत्थर देखा |–डॉ. प्रेम जौनपुरी

हमने इंसान को बनते हुए पत्थर देखा |–डॉ. प्रेम जौनपुरी   डॉ. प्रेमचंद्र विश्वकर्मा ( प्रेम जौनपुरी ) की  शक्सियत किसी तार्रुफ कि मोहताज नहीं | एक मशहूर गज़लकार के साथ साथ रीडर ,तिलकधारी विधि महाविद्यालय जौनपुर, डीन (अधिष्ठाता) विधि संकाय वी०बी०एस. पूर्वांचल विश्वविधालय भी हैं | डॉ. प्रेमचंद्र विश्वकर्मा ( प्रेम जौनपुरी ) का जन्म १८ जुलाई १९४९ में ग्राम पोस्ट कोहडा सुलतानपुर जिला जौनपुर में हुआ | इनकी शिक्षा जौनपुर और वाराणसी से हुई | आपने … Read entire article »

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आओ कहें…दिल की बात -मेरी बेगम

आओ कहें…दिल की बात -मेरी बेगम

मेरी बेगम कहना ये है कि पिछले कुछ दिनों से बहुत परेशान हूँ मैं. कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ. जिन दिनों का सबसे ज्यादा इन्तजार था…जिन दिनों के लिए सबसे ज्यादा अरमान पाल रखे थे मैंने अब वो दिन आया है मेरी जिन्दगी में…लेकिन मैं वैसा कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ जैसा मैंने सोचा था…जो मैं चाहता था और जो मेरे अरमान थे. शायद वजह मैं ही हूँ…! मेरी “बेगम” का कहना … Read entire article »

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साहित्य वाचस्पति डॉ .श्रीपाल सिंह क्षेम : विनम्र श्रद्धांजलि

साहित्य वाचस्पति डॉ .श्रीपाल सिंह क्षेम : विनम्र श्रद्धांजलि

‘कुछ रीतों, कुछ अनरीतों में कुछ दिन बीत गये मीतों में, पर मेरे उतने ही दिन थे जितने बीत गये गीतों में।’’ इन पंक्तियों के रचयिता छायावादी कविता के राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कवि साहित्य महारथी, साहित्य वाचस्पति जैसे अलंकरणों से अलंकृत कृष्ण द्वैपायन महाकाव्य सहित दर्जनों काव्य खण्डों की रचयिता, गीतों के राजकुमार, तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. श्रीपाल सिंह क्षेम का 89 वर्ष की अवस्था में बुधवार को … Read entire article »

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अपने अन्दर के लोकपाल को जागृत करें ..प्रो.सुंदर लाल

अपने अन्दर के लोकपाल को जागृत करें ..प्रो.सुंदर लाल

स्वत्रन्त्रता दिवस के  पावन अवसर पर विश्वविद्यालय में ध्वजारोहण  के  पश्चात  विश्वविद्यालय के सम्मानित शिक्षक बन्धुओं ,अधिकारीगण और कर्मचारी भाइयों  को   स्वत्रन्त्रता दिवस की शुभकामना और बधाई   के साथ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय   के  कुलपति प्रो.सुंदर लाल जी नें कहा कि हमारे देश ने स्वत्रन्त्रता पश्चात  प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की  है .इस महान देश   को   सबके योगदान और  सहयोग से अभी बहुत आगे ले जाना है और यह तभी संभव है जब … Read entire article »

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जौनपुर अब हिंदी ब्लोगिंग के क्षेत्र में भी आगे

जौनपुर अब हिंदी ब्लोगिंग के क्षेत्र में भी आगे

ब्लोगिंग को आज़ाद पत्रकारिता भी कहा जाता है. यहाँ आप आज़ाद हैं किसी भी विषय पे अपने विचार खुल कर प्रकट करने के लिए और इसका फाएदा  समाज को बहुत से ब्लॉगर अपनी बेहतरीन लेखनी से पहुंचा भी रहे हैं. जौनपुर निवासियों ने भी पहचाना ब्लोगिंग के  महत्व को और कई वर्षों से इस क्षेत्र मैं कार्यरत हैं. मैंने कोशिश कि है कि मैं कुछ स्थापित ब्लोगर के ब्लॉग से आप सभी को परिचित करवा … Read entire article »

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रमज़ान मुबारक ..एस एम मासूम

रमज़ान मुबारक ..एस एम मासूम

हे विश्वासियों! रोज़ा तुमहारे लिए निर्धारित है, क्योंकि यह उन लोगों के लिए भी था जो तुम से पहले थे ताकि तुम बुराई से दूर रह सको!. रोज़े (उपवास) के दिन की एक निश्चित संख्या है … (पवित्र कुरान अध्याय 2, छंद 18 आज जौनपुर शहर मैं रमजान के आने से पहले की चहल पहल देखी जा सकती है.  मस्जिदों मैं रौनक पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं लोगों ने सहर और इफ्तार का इंतज़ाम करना … Read entire article »

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मादरडीह गांव के उत्खनन से खुल रहे अतीत के पन्ने गतांक से आगे

मादरडीह गांव के उत्खनन से खुल रहे अतीत के पन्ने गतांक से आगे

जौनपुर ..मादरडीह गांव के उत्खनन से खुल रहे अतीत के पन्ने आज -कल पुरातात्विक उत्खनन को लेकर जौनपुर चर्चा में है. और हो भी क्यों न ,जौनपुर के … Read more » By Dr.Manoj Mishra गतांक से आगे…… अब तक के उत्खनन के आधार पर मेरी पिछली पोस्ट में इस संभावना की ओर इशारा किया गया था कि संभव है कि आज से करीब २५०० वर्ष पूर्व यहाँ एक नगरीय और विकसित संस्कृति स्थापित थी .इस दिशा में … Read entire article »

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जौनपुर ..मादरडीह गांव के उत्खनन से खुल रहे अतीत के पन्ने

जौनपुर ..मादरडीह गांव के उत्खनन से खुल रहे अतीत के पन्ने

आज -कल पुरातात्विक उत्खनन को लेकर जौनपुर चर्चा में है. और हो भी क्यों न ,जौनपुर के अतीत के पन्नों को जानने की उत्सुकता हर किसी को है.जिला मुख्यालय से लगभग ५५ किलोमीटर दक्षिण -पश्चिम में मुंगराबादशाहपुर के पास स्थित यह गांव जनश्रुति के अनुसार कभी भर राजाओं के निवास का केंद्र था.लगभग २ किलोमीटर की परिधि में फ़ैली यह ग्राम-पंचायतआज भी टीले पर ही अवस्थित है.गांव के बीच में ही डीह-बाबा का स्थान भी … Read entire article »

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आईये आज मिलये जनाब कैस जौनपुरी से : जौनपुर की युवा प्रतिभाएं

आईये आज मिलये  जनाब कैस जौनपुरी से : जौनपुर की युवा   प्रतिभाएं

जब कैस जौनपुरी साहब का तारूफ उनके की कुछ अशार से शुरू करता हूँ . उन्होंने अपनी पहचान कुछ इस तरह से करवाई है. उड़ते परिंदे की चाहत अधूरी हूँ मैं चलते मुसाफिर की कोशिश पूरी हूँ मैं मिल जाएगी मंजिल एक दिन मुझे भी एक परिंदा, एक मुसाफिर एक जौनपुरी हूँ मैं कैस जौनपुरी हूँ मैं वतन से मुहब्बत और कुछ कर सकने की ख्वाहिश यकीनन इनको कामयाबी की उच्च शिखर … Read entire article »

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जौनपुर कि मूली विश्व भर मैं अजूबा

मूली की नेवार प्रजाति जो कभी जौनपुर कि शान रही थी आज तलाशने पे भी नहीं मिलती.नेवार के नाम से मशहूर मूली का अब अता-पता नहीं .शहरीकरण जौनपुर की पहचान रही इस प्रजाति को निगल गया .यह मूली अपने बड़े अकार और मीठे स्वाद के लिए मशहूर थी. आप को जान के आश्चर्य होगा कि यहाँ की मूली छह से सात फीट लंबी व ढाई फीट मोटी होती थी. इस मूली को जौनपुर की सीमा से लगे आधा दर्जन गांवों में उगाया जाता था. इन सभी गांवों के करीब से गोमती नदी बहती है. लिहाजा सिंचाई के भरपूर साधन रहे हैं. अपनी भौगोलिक परिस्थिति और खास किस्म की मिट्टी के चलते नेवार प्जाति की मूली जौनपुर में ही होती है.   किसी जमाने में पूरी दुनियां में सब पर भारी रहा … Read entire article »

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