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रेलिया बैरग पिया को लिए जाय रे…कताई मिल
रेलिया बैरग पिया को लिए जाय रे………….. मालिनी अवस्थी का यह दर्द भरा गाना अब जौनपुर की एक दो नही बल्कि १२०० महिलाये गाने को मजबूर हो गई है, इसका मुख्य कारण है जौनपुर में स्थापित कताई मिल को स्लो डाउन हड़ताल नामक दीमक ने पूरी तरह चाट डाला है. यह मिल बंद होने से १२ सौ परिवारों पर रोजी रोटी का सकट आ गया है . ऍसी स्थिति में बेरोजगार हुए लोग महानगरो का रुख करने को मजबूर हो गये है
जौनपुर व आसपास के जनपदों के लोगो को रोजगार मुहैया कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश स्टेट यार्न कम्पनी ( कताई मिल ) की स्थापना सन १९८६ में किया था. शुरुवाती दौर में यह मिल राज्य सरकार को काफी लाभ पहुचाया ही साथ सैकड़ो बे रोजगार लोगो को रोजगार भी दिया. लेकिन इस मिल को बीच के दिनों में भष्ट्राचार का जग लग गया था जिसके चलते महीने में करोड़ो रूपये कमाने वाली कम्पनी घाटे में चलने लगी. जिसका परिणाम हुआ कि इस फैक्ट्री पर अरबो रूपये का कर्ज लद गया. कई बार ऐसा भी समय आया कि सरकार कम्पनी में ताला लगाने का पूरा मन बना लिया था. लेकिन मजदूर यूनियन और स्थानीय प्रशासन के दबाव में मिल तो बंद तो नही हुआ लेकिन कभी भी स्वस्थ नही हो सका लगभग १० वषो तक वेंटिलेटर पर चलने वाले इस मिल की आखिरी सास वेतन बढ़ाने के लिए शुरू हुए स्लो डाउन हड़ताल ने छीन लिया. यह फैक्ट्री बंद होने से एक हजार २०० लोग बेरोजगार हो गये है. जिन्दगी की आधे से अधिक उम्र इस कम्पनी के सहारे पार करने वाले कर्मचारियों के सामने रोजगार का सकट खड़ा हो गया है . अब इनके सामने अपना वतन छोड़ने के आलावा कोई रास्ता नही बच्चा है. जिनकी उम्र प्रदेश से बाहर जाने की है वह बाहर जाकर नैकरी की तलास शुरू कर दी है. जो जिन्दगी की आखिरी पड़ाव पर है वो आसपास में ही छोटी मोटी रोजगार तलाश रहे है
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