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ब्लॉगर कैसे बने और ब्लॉग कैसे बनाएं

ब्लॉगर कैसे बने और ब्लॉग कैसे बनाएं पे  एक पूरी किताब लिखी जा सकती है. लेकिन मैं यहाँ उन बातों का ही ज़िक्र करूँगा जीना जाना अधिक ज़रूरी है. सब से पहले तो यह सवाल आता है कि आप क्या ऐसा लिख सकते हैं जिसे लोग समझ सकें? यदि हाँ तो आप को सबसे पहले यह समझना होगा कि ब्लॉग है क्या?

ब्लॉग हकीकत मैं एक ऑनलाइन डायरी है. या यह कह लें कि सार्वजनिक डायरी है जिसका फायदा या नुकसान उसको हर एक पढने वाले को होता है. इसमें आप किसी भी अपने पसंद के विषय पे लिख सकते हैं लेकिन मेरा मानना है कि अपनी घरेलु बातें सार्वजनिक करना उचित नहीं क्योंकि इसका फायदा  कम और नुकसान अधिक देखा गया है.

ब्लोगिंग  प्लेटफार्म

अब यदि आप तैयार है अपने लेख , अपनी बातें , अपनी कविताएँ सार्वजनिक करने के लिए तो फिर सवाल होता है यह डायरी कहाँ पब्लिश कि जाए. वैसे तो ब्लॉग बनाने के लिए बहुत सी वेबसीतेस मुफ्त सुविधा देती हैं लेकिन सब से मशहूर है ब्लॉगर और वर्डप्रेस. दोनों ने अपने अपने तरीके से बहुत सी सुविधाएं दी हुई हैं आप उनको देख कर  और पसंद का प्लेटफार्म चुन सकते हैं. नए ब्लॉगर को  मैं ब्लॉगर कि सलाह दूंगा क्यों कि यहाँ टिप्पणी भी अधिक मिलती है और आप कि पहचान भी जल्द हो जाया करती है यदि आप कि लेखनी मैं दम है तो. लेकिन सशक्त प्लेटफार्म मेरी नज़र मैं वर्डप्रेस है और पुराने ,मशहूर ब्लॉगर इसे अधिक पसंद करते हैं.
चूँकि यह लेख नए ब्लॉग लेखको को नज़र मैं रख के लिखा जा रहा है इसलिए मैं ब्लॉगर प्लेटफार्म के बारे मैं अधिक बात करूँगा.
लोगों तक पहुँचाना
ब्लॉग बना लेने के बाद इसको लोगों तक पहुँचाना भी बहुत ज़रूरी हुआ करता है और सबसे बेहतर रास्ता हुआ करता है संकलक कि मदद लेना.

१) आप अपना ब्लॉग किसी संकलक मैं रजिस्टर कर दें.
२) आप दूसरों के ब्लॉग को फालो करें.
३) दूसरों को पढ़ें और उनपे  ईमानदारी से विचार प्रकट करे.

४) अपने ब्लॉग को ट्विट्टर और फसबूक जैसे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट से जोडें.
ऐसा करने से आप के ब्लॉग पे लोगों कि नज़र पड़ेगी और लोग आना जाना शुरू कर देंगे.

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2 Responses to "ब्लॉगर कैसे बने और ब्लॉग कैसे बनाएं"

  1. gupta90143 says:

    मिल रहा आर्थिक लाभ, किसान हो रहा मालामाल
    सिवनी (एमपी मिरर)। जिले में शासन की किसान हितैशी योजनाएं कितनी कारगर सिद्ध हो रही हैं यह आये दिन देखने और सुनने को मिल रहा है म.प्र. सरकार के मुखिया जो किसान के हमदर्द माने जाते हैं, जिन्होने किसानों की खेती को लाभ का सौदा बनाकर उनकी जिंदगी को खुशहाल बनाने का हर संभव प्रयास करते हुये किसानों को मालामाल करने में उनके हितार्थ नित नई योजनाएं लागू कर रहे हैं। प्रदेश शासन की लाभकारी योजनाओं का फायदा उठाते हुये किसानों की तकदीर पल पल बदलती जा रही है और किसान अपनी मेहनत के दम पर विकसित होता जा रहा है।
    ऐसा ही एक प्रमाण गत दिवस मिला जहां किसान ने अपनी आर्थिक तंगी से उबरने के लिए हर तरफ से हैरान परेशान होकर अंत में शासन की किसान हितैशी लाभकारी योजनाओं की जानकारी को प्राप्त कर अपने विकास की राह को खुद ही खोज निकाला मामला है सिवनी जिले के मोहगांवकला गांव के एक मध्यम श्रेणी किसान तुलाराम पटेल का जिन्होने अपनी जिन्दगी अब उसकी खुद की मेहनत और सरकार के उद्यानिकी विभाग की मदद से पूरी तरह बदल बदल डाली है। पहले 1.20 हेक्टेयर में गेहूं उगाकर भी अपने परिवार का बमुश्किल गुजारा चलाने वाले तुलाराम अब केवल हायब्रिड टमाटर 5005 उगाकर सारे खर्च काटने के बाद 15000 रूपये का शुद्व लाभ कमा रहे है। परम्परागत खेती से उदर पोषण लायक आय तक न होने से आजिज हो चुके तुलाराम ने केवल अपनी सोच व खेती बदलकर उद्यानिकी विभाग की मदद व रसद से यह उपलब्धि पाई है। तुलाराम बताते है कि वे विशुद्व रूप से किसान हैं। उनके खेत में कुंआ भी था। परन्तु उसका उपयोग वे ङ्क्षसचाई के लिए नहीं कर पाते थे। कुछ अच्छे दिन नहीं थे वे। वर्ष 2008 तक तो हालात ऐसे ही रहे। पर इन्ही दिनों जब तुलाराम ने अपनी यह जड़वत समस्या क्षेत्रीय उद्यान अधीक्षक को बताई तो उन्होंने तुलाराम को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मल्टी स्टोरी आर्चड योजना की जानकारी दी। जिसके अंतर्गत एक एकड भूमि में फैन्सिग, विद्युत डीजल पम्प, हायब्रिड किस्म में पुष्प, सब्जी बीज एवं ड्रिप ङ्क्षसचाई प्रणाली स्थापित करने हेतु अनुदान दिया जाता है। तुलाराम ने योजना को न केवल समझा वरन इसे बड़ी समझबूझ के साथ अमल में लाने का निश्चय किया।
    उन्होंने अपने एक एकड रकबे में पोल फैन्सिग एवं पौधरोपण के लिए विद्युत मोटर स्प्रेयरपंप एवं अन्य सामग्री हेतु उद्यानिकी विभाग से अनुदान प्राप्त कर कार्य प्रारंभ कर दिया। वे बतातें है कि फैङ्क्षन्सग एवं विद्युत मोटर स्प्रेयरपंप लगने के बाद तो उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। उन्होंने उद्यान अधीक्षक की सलाह पर भूमि के 0.2 हेक्टेयर रकबे में हायब्रिड टमाटर 5005 की खेती शुरू कर दी। उनकी कड़ी मेहनत का फल तो सामने आना ही था, सो आया। फसल आने पर उन्होंने 20,000 रूपये की टमाटर बेची और घर-परिवार एवं खेती का खर्च काटकर 15000 रूपये की शुद्व आय प्राप्त की। एकसाथ इतनी नगद आय से अभिभूत तुलाराम अब हायब्रिड खेती के मुरीद हो गये है। अभावों से भरे अपने पिछले दिनों को याद करते हुए वो कहता है कि पहले 1.20 हेक्टेयर में गेहूं की खेती से वे सिर्फ 10-12 हजार रूपये का अनाज ही ले पाते थे और अब हायब्रिड खेती के जरिये वे एक छोटे से रकबे से ही 15000 रूपये अतिरिक्त आय के रूप में कमा रहे हैं। तुलाराम इन दिनों बेहद प्रसन्न है।
    वे इस साल पूरे एक एकड रकबे में हायब्रिड टमाटर और बैगन लगाकर और अधिक लाभ अॢजत करने के लिए अभी से जुट गये है। परम्परागत खेती के प्रति उसका नजरिया अब पूरा बदल चुका है। वो दूसरे किसानों को भी खेती बदलने की सीख देते हुए कहते है कि अगर कम मेहनत से ज्यादा फायदा कमाना हो, तो किसानों को हायब्रिड किस्मों की खेती अपनाना चाहिये। इस खेती के एक नहीं, कई फायदे है। खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए सरकार तो प्रयास कर ही रही है। किसानों को भी आगे आकर सरकार का हाथ थाम लेना चाहिये। तुलाराम की बातों में दम है, आखिर खुद उसनं भी तो यही किया है। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक भी तुलाराम की बातों से पूरा इत्तफाक रखते हुए कहते है कि परम्परागत खेती के बेशक अपने फायदे होते होंगे, पर उद्यानिकी विभाग की योजनायें क्षेत्र के किसानों को विकासशील से विकसित बनाने के लिए हैं। वे कहते हैं कि फल व पौध रोपण विकास योजना, टाप वॢकग योजना, बाडी किचन गार्डन योजना, मसाला विकास योजना, औषधि एवं सुगंधित फसल योजना, आलू प्रदर्शन, पुष्प प्रदर्शन, संकर मिर्च उत्पादन, माईक्रो इरीगेशन योजना, मल्टीस्टोरी आर्चड योजना, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, प्लास्टिक केटस वितरण, पुराने बगीचों का जीर्णोधार, जायद संकरबीज वितरण एवं आंवला पौधरोपण योजना आखिर किसानों के आॢथक सशक्तिकरण की मूलभावना से ही बनाई गई हैं। किसानों को इनका लाभ उठाना ही चाहिये।

  2. gupta90143 says:

    पत्थरों को तोडती वो अधमरी सी बुढ़िया

    बन गयी है वो आज बेजान सी गुडिया

    कभी वो भी रहती थी महलों के अन्दर

    कभी थी वो अपने मुकद्दर का सिकंदर

    असबाबों से था भरा उसका भी महल

    नौकरों और चाकरों का भी था चहल पहल

    बड़े घर के रानी का राजा था दिलदार

    नहीं थी कमी कुछ भी भरा था वो घरबार

    किलकारियां खूब थी उस सदन में

    अतिथि का स्वागत था भव्य भवन में

    पूरे शहर में था ढिंढोरा इनका

    गरीब जो आये न जाए खाली हाथ

    शहर के धनिकों में था इनका स्वागत

    शहर बड़े लोग थे इनसे अवगत

    पर चाहो हमेशा जो होता नहीं वो

    कठीनाइयों से भरे दिन आ गए जो

    व्यवसाय की हानि सम्भला न उनसे

    बेटे-बहू ने रखा न जतन से

    बड़े घर के राजा न सहा पाए वो सब दिन

    वरन र लिया मृत्यु को पल गया छिन

    बुढ़िया बेचारी के दिन बाद से बदतर

    गर्भधारिणी माँ को किया घर से बेघर

    करती वो क्या कोई चारा नहीं था

    इस उम्र में कोई सहारा भी नहीं था

    मेहनत मजदूरी ही थी उसकी किस्मत

    लो वो आ गयी राह पर तोडती पत्थर

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